हर मुश्किल पति नार्सिसिस्ट नहीं होता — लेकिन
हर मुश्किल पति नार्सिसिस्ट नहीं होता — लेकिन वास्तविक नार्सिसिस्टिक व्यवहार को नज़रअंदाज़ भी नहीं करना चाहिए पिछले कुछ वर्षों में "नार्सिसिस्ट" शब्द रिश्तों और विवाह संबंधी चर्चाओं में बहुत प्रचलित हो गया है। सोशल मीडिया, पॉडकास्ट और मनोविज्ञान से जुड़े कंटेंट ने लोगों को इस विषय के बारे में पहले से अधिक जागरूक बनाया है। यह जागरूकता कई मायनों में अच्छी है। अब लोग भावनात्मक शोषण, हेरफेर (Manipulation) और अस्वस्थ रिश्तों के संकेतों को बेहतर ढंग से पहचान पा रहे हैं। लेकिन इसके साथ एक नई समस्या भी पैदा हुई है—हर रिश्ते की समस्या को नार्सिसिज़्म समझ लेना। आजकल कई महिलाएँ जब वैवाहिक कठिनाइयों का सामना करती हैं, तो जल्दी ही यह निष्कर्ष निकाल लेती हैं कि उनके पति नार्सिसिस्ट हैं। कभी-कभी यह सही भी हो सकता है, लेकिन इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण रखना आवश्यक है। पहली गलती: हर समस्या को नार्सिसिज़्म मान लेना हर शादी में कठिन दौर आते हैं। स्वभाव का अंतर, संवाद की कमी, आर्थिक दबाव, बच्चों की जिम्मेदारी, काम का तनाव या अधूरी अपेक्षाएँ—ये सभी कारण पति-पत्नी के बीच तनाव पैदा कर सकते हैं। ...