ईश्वर ने जीवन को सरल बनाया, इंसानों ने उसे जटिल बना दिया
ईश्वर ने जीवन को सरल बनाया, इंसानों ने उसे जटिल बना दिया मानव इतिहास पर नज़र डालें तो एक बात स्पष्ट दिखाई देती है—हर व्यक्ति शांति, सम्मान, न्याय और सुख चाहता है। फिर भी समाज में भेदभाव, अन्याय, शोषण और संघर्ष लगातार बने हुए हैं। प्रश्न यह है कि यदि इंसान स्वाभाविक रूप से शांति चाहता है, तो फिर वह अशांति पैदा करने वाली व्यवस्थाओं को क्यों अपनाता है? इसका एक बड़ा कारण यह है कि लोग ईश्वर के मार्गदर्शन को छोड़कर मनुष्यों द्वारा बनाई गई परंपराओं, सामाजिक पूर्वाग्रहों और अन्यायपूर्ण व्यवस्थाओं को अपनाने लगते हैं। ईश्वर की शिक्षाएँ मानवता को सरलता, न्याय और समानता का संदेश देती हैं। वे बताती हैं कि सभी मनुष्य एक ही मूल से पैदा हुए हैं और उनकी वास्तविक पहचान उनके कर्म और चरित्र से होती है, न कि जन्म, जाति, वंश या सामाजिक दर्जे से। इस्लाम ने मानव समाज के सामने कुछ ऐसे सिद्धांत प्रस्तुत किए जो मानव गरिमा और समानता को स्थापित करते हैं: किसी व्यक्ति को जन्म के साथ जाति का बोझ नहीं दिया जाता। मनुष्य की श्रेष्ठता उसके चरित्र और धर्मपरायणता से मापी जाती है, जन्म से नहीं। हर व्यक्ति बिना किसी पुजारी ...